अजीर्ण का तुलसी और घरेलू नुस्खे से इलाज

जब कोई मनुष्य अधिक आहार करता है समय से पहले भोजन करना और कभी भी, कहीं भी, कुछ भी खा-पी लेता है और बार-बार कुछ न कुछ खाते रहने से जो पहले खाया हुआ भोजन ठीक से हजम नहीं हो पाता है और दूसरा भोजन हम लोग खा लेते है अथवा असमय भोजन करता है तो उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है| और उसको खट्टी डकारे आने लगती है जिसके कारण कुछ खाने का मन नहीं होता इस तरह पाचनतंत्र मे गड़बड़ी होने के कारण भोजन न पचने को अजीर्ण या अपचन कहते है| इस लिए आज हम अजीर्ण के कारण इसके इलाज और अन्न घरलु नुस्खे के बारे मे बात करंगे तो चलिये जानते है इसके कारण और इलाज क्या है |

अजीर्ण के कारण – Due to indigestion

Indigestion के रोग होने के कई कारण होते है जैसे बाहर की चीजों को बार-बार खाते रहना कुछ न कुछ खाते रहना पहला भोजन हजम होने से पहले ही फिर कुछ खा-पी लेने के कारण पाचन क्रिया बिगड़ जाती है|  जिसके कारण कब्ज हो जाता है| पतले दस्त आने लगते है और खट्टी डकारे आना, पेट फूलना, पेट मे गैस बनना, पेट मे दर्द होना, सिने मे जलन आदि लक्षण पैदा हो जाते है|

अजीर्ण के लक्षण – Symptoms of indigestion

Indigestion के रोगी को भूख नहीं लगती| भोजन करते वक्त भूख न लगना जिससे की खाना ठीक से नहीं खा पाना और खाने का स्वाद अच्छा नहीं लगता कुछ खाने का मन नहीं करना खट्टी-खट्टी डकारे आने लगती है सिने मे तेज जलन होती है पेट भारी सा हो जाता है| इस रोग मे रोगी को जिस्म मे थकावट सी महसूस होती है कुछ काम करने का मन नहीं करता है| जिस्म गिरा-गिरा सा महसूस होता है| इस रोग मे नींद भी नहीं आती और कभी-कभी रोगी को अतिसार (दस्त) भी हो जाते है|

अजीर्ण का तुलसी से इलाज – Indigestion treatment

दो तोले गुड़ और एक तोला सोंठ, दोनों मिलाकर पीसें और एक तोला तुलसी रस खूब अच्छी तरह मिलाकर राई समान गोलियां बना लें| सुबह-शाम एक-एक गोली पानी के साथ लेने से ही पाचन क्रिया दुरुस्त हो जाएगी और भूख का अहसास जाग उठेगा|

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अजीर्ण होने पर बेहतर यह होगा कि उस समय आप एक दिन का उपवास रखें और पानी लेते रहें ताकि आपके पेट की सफाई पूरी तौर से हो जाए|

आप अजीर्ण होने पर तुलसी का प्रयोग निम्र विधियों मे से किसी भी प्रकार से कर सकते है-

  1. ताजे तुलसी के पत्ते तोड़ें और एक तोला रस निकाल कर पी जाइए| लेकिन कोशिश यही करें कि तुलसी के पौधे में पत्ते तोड़ने की आवश्यकता न पड़े, अगर तुलसी का पौधा ज्यादा बड़ा और उसकी पत्तियाँ घनी हैं तो पौधे का आस-पास हवा के झोकों से या अपने आप टूटकर पत्तियाँ अवश्य गिरती हैं| जहां तक सम्भव हो, अपने आप टूटकर गिरी पत्तियों का ही इस्तेमाल करें| क्योंकि तुलसी को ग्रन्थों में भगवान की पत्नी माना गया है, उन्हें जानबूझकर तोड़ना तुलसी के लिए कष्टदायक है| फिर भी अगर पत्ते तोड़ने पड़ें तो हर पत्ते को तोड़ते समय भगवान से क्षमा याचक करना न भूलें|
  2. एक ग्राम काले नमक में दस ग्राम तुलसीदल पीसकर चाटिए और पानी पी जाइये|
  3. पांच ग्राम तुलसी पत्ते एव पाँच ग्राम काली मिर्च एक साथ पीसकर बारीक करके चाट लें|
  4. अगर अजीर्ण होने के साथ-साथ आपने पेट में दर्द भी महसूस हो तो तुलसी और अदरक का रस मिलाकर एक-एक चम्मच दो-दो घंटे के अन्तर से तीन बार लें|

अगर आप इस रोग को गुनगुना कर लेगें तो तत्क्षण लाभकारी होगा| तुलसी के पत्ते किसी भी प्रकार के बुखार में लाभप्रद सिद्ध होते हैं| खतरनाक से खतरनाक बुखार में अगर दो-चार पत्ते कुचलकर चाय में उबालकर पिए और चादर ओढ़कर विश्राम करें तो पुराने से पुराने बुखार में लाभ होगा| यह हमारा मत नहीं है बल्कि पुराने आयुर्वेदाचायों का आजमाया गया नुस्खा है|

अजीर्ण का घरलु नुस्खे से इलाज – Home remedies of indigestion

प्याज : तले हुए स्वादिष्ट पदार्थ खाने में बड़े मजेदार लगते है| परन्तु उन्हें पचाना टेढ़ी खीर होती है| खासकर जो लोग सैर या व्यायाम नहीं करते, उन्हे तो वैसे ही गरिष्ठ (हैवी) पदाथों से परहेज रखना चाहिए| तली हुई चीजें लगातार खाने से अजीर्ण हो जाता है|

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और उसके साथ-साथ कब्ज, गैस, सिरदर्द, उदरशूल और बेचैनी भी पैदा हो जाती है| एसी अवस्था में प्याज का रस निकाल लेवें और उसमे नमक मिलाकर पीने से अजीर्ण में तुरन्त लाभ होता है| शरीर के अंदर के दसों द्रार खुल जाएंगे और कुछ ही पल में आपको आराम मिलने लगेगा|

जो लोग प्याज का इस्तेमाल न करना चाहें या धर्मानुसार उससे परहेज करते हों, वह रोगी अजीर्ण होने की अवस्था में ” लवण भास्कर” चूर्ण ताजे पानी से दिन में दो बार लें, अवश्य लाभ होगा| लेकिन इस बात का ख्याल रखें कि यह चूर्ण आवश्यकता से अधिक न लें, क्योंकि इसकी ज्यादा मात्रा लेने से दस्त होने की सम्भावना होती हैं| (लवण भांस्कर) सदियों से आजमाया जा रहा पेट के विकारों के लिए रामबाण चूर्ण है|

आंवला : सर्दी-गर्मी के असर से पचाने की आग ठंडी पड़ जाने पर भी अजीर्ण हो सकता है| ऐसी दशा में अजीर्ण हो जाए तो आंवले का चूर्ण शहद में मिलाकर चाट लें| अगर शहद न हो तो आप बेहिचक घी मिला सकते हैं| अगर आपको घी अच्छा नहीं लगता हो तो आप आंवले के चूर्ण की फंकी मारकर पानी ही पी लें|

सुबह होने तक आपकी पाचने की आग, खाया-पिया पचा चुकी होगी और आप को खाने की भूख महसूस होगी |

नींबू : अगर आप अजीर्ण हो जाता है तो अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उन पर नींबू निचोड़कर उसमें ऊपर से काला नमक छिड़ककर चटखारे ले-ले कर चबाइए| देखते ही देखते आपको डकार आएगी और अजीर्ण ठीक हो जाएगा |

  1.  अदरक के टुकड़े थोड़ा गुड और काले नमक नींबू के रस में मिलाकर सिल पर पीसकर चटनी बनाइए और स्वाद के साथ चाट जाइए| चन्द क्षणों के बाद ही फुर्ती आ जाएगी |
  2. नींबू के बीच से काटकर उस पर काला नमक छिड़क दीजिए| अब इसे हल्की-सी आंच पर गरम करके चूस लीजिए| क्षणों में चैतन्य होकर आप भले-चंगे हो जाएंगे |

गाजर : बुझी हुई पेट की आग को भड़काने के लिए गाजर का पचास ग्राम रस निकालिए और शहद के दो चम्मच मिलाकर पी जाइए| अपच में यह तरल दावा ऐसे ज्वलनशील पदार्थ का काम करेगी कि भोजन पचाने की आग तो भड़क उठेगी किन्तु शरीर को जलाने की बजाय हरा-भरा कर देगी| शहद न हो तो काली मिर्च के पांच दाने, दो ग्राम काला नमक और दालचीनी का एक टुकड़ा नींबू की बूंदों में पीसकर गाजर रस में घोलकर पी जाएं| दिन में तीन बार सेवन करने से अपच, खट्टे डका, पेट की जलन और भारीपन सब रोग केट जाएंगे |

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और है याद रहे, तेज नमक खाने वालों को अक्सर अजीर्ण रहता है |

अदरक : कब खाएं….?   क्यों खाएं…..?  कितना खाएं….?

जो आदमी इन तीन बातों को याद नहीं रखता है उसे अजीर्ण भी होती है और परेशान भी होना पड़ता है| अजीर्ण बदबूदार रोग है| इस रोग का रोगी खुद भी नाक और भौंह सिकोडता है, साथ ही साथ बदबूदार गन्दी हवा भी छोड़ता है तथा दूसरों की नाक भी जलाता है |

  1. अदरक की गांठ और नींबू की दस बूंदें साथ रखकर चुटकी भर सेंधा नमक डालकर सिल पर पीसें और चाटें| अगर आप इसे चाट नहीं सकते है तो ताजे जल में मिलाइए और पी जाइए |
  • ध्याद रहे पानी आधा गिलास से अधिक नहीं होना चाहिए |
  • इससे आप का पेट भी साफ हो जाएगा और भूख भी जागेगी |

2॰ यदि आप छोटी इलायची के दाने दस ग्राम, मुनक्का दस ग्राम (बिना बीज), अनारदाना, सफेद जीरा और काला नमक तथा एक गांठ              अदरक के रस में पीसने के बाद खट्टी-मीठी चटनी बनाकर, इसके तीसरे हिस्से को चार-चार घंटे के अन्तर से चाटें |

इस सेवन से पांच-छ: घंटे बाद बड़े जोर की भूख लगती है| उस समय थोड़ा सा सब्र दिखायें और पपीता खाएं| पपीते और चीकू के अड़तालिस घंटे बाद आप खिचड़ी और दही ले सकते है |

हेल्लो दोस्तो अजीर्ण का तुलसी और घरेलू नुस्खे से इलाज कैसी लगी आप को यह पोस्ट हमे कमेंन्ट करे और अपने दोस्तो के साथ शेयर करें |

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