बवासीर को जड़ से खत्म करने का अचूक इलाज और 10 घरेलू उपाय

Bawasir ko jad se khatm karne ke upay aur rambaan ilaj in hindi : बवासीर या अर्श को अंग्रेजी में Piles कहते है| तकलीफ की आरम्भिक अवस्था में गुदा द्धार की भीतरी और बाहरी नसों में खुजली और जलन मालूम होती है| जलन कभी भीतरी नस में होती है, कभी बाहरी और कभी भीतरी और बाहरी-दोनों नसों में| जिस जगह जलन और खुजली होती है

वहां बिना मुंह के फोड़े की सी छोटी-छोटी गाठें जिनको मस्से भी कहते है निकली होती है जो आगे चलकर काफी बड़ी हो जाती है| ये ही जब फट जाती हैं और उनसे रक्त निकलने लगता है तो बवासीर खूनी कहलाती है| रक्तहीन बवासीर को बादी बवासीर कहते है| आज इस लेख में हम जानेंगे ayurvedic medicine, homeopathic and natural home remedies (gharelu nuskhe) for piles treatment at home in hindi.

बवासीर कोई रोग नहीं, अपितु रोग का लक्षण है| यह रोग सभ्य समाज का रोग है| मैदा डबल रोटी, डिब्बा बन्द वस्तुएं प्रयोग करने से पेट साफ नहीं होता और कब्ज जब बराबर बना रहता है, तब आंतों में सड़न से गर्मी बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप आंतों की झिल्ली कमजोर हो जाती है, गुदाप्रदेश में भारीपन का अनुभव होता है, मलत्याग में कठिनाई और कष्ट होता है तथा गुदा के पास की नसों की अंतिम छोर में दूषित रक्त इकट्ठा हो जाने से धीरे-धीरे बन्द गोश्त गंदा मांस की स्रष्टि हो जाती है| यही बवासीर है|

गुदा के पास की नसें या शिरायेँ शरीर की एक लम्बी रक्तवाही शिरा का सबसे निचला भाग है जिस पर मलमार्ग की पेशियां असाधरण अवस्था में अनावश्यक दबाव डाल कर उन शिराओं के रुधिर-प्रवाह में रुकावट डालती हैं, जिससे वे रक्त से भरकर सूज जाती है| कभी-कभी स्त्रियों को गर्भाशय में गर्म के ही भार से ऐसा होता है जो प्रसव के अनन्तर आप से आप दूर हो जाता है| जब मनुष्य की रीढ़ में कोई रोग होता है तो उसके दुद्रेव्य का भार गुदा मार्ग की शिराओं पर पड़ने से भी बवासीर के मस्सों की उत्पत्ति होती है|

ये मस्से इस बात को प्रगट करते है कि शरीर विजातीय द्रव्य से लदा हुआ है, रक्त दूषित हो चुका है, तथा कोष्ट में मल भरकर पुराना पड़ चुका है| इस कथन से स्पष्ट है कि बवासीर का मूल कारण कब्ज के कारणों में से कब्ज होना सिर्फ एक कारण है| क्यूंकि हर कब्ज के रोगी को बवासीर नहीं होती, परन्तु हर बवासीर के रोगी को कब्ज होना जरूरी है| बवासीर के अन्य कारणों में यक्रत की खराबी, उदर-विकार तथा किसी प्रकार का रक्त-विकार आदि हो सकते है|

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बवासीर में क्या नहीं खाना चाहिए 

  • कॉफी और चाय का ज्यादा सेवन से बचे|
  • सिगरेट, शराब, तम्बाकू और धूम्रपान इन सब चीजों से परहेज करे|
  • बासी खाना, मछ्ली, मांस, उरद की दाल और खटाई खाने से बचे|
  • ज्यादा चटपटा और तेज मिर्च मसाले वाला खाने से बचे|
  • डिब्बा बंद भोजन और बैंगन, आलू खाने से पहरेज करना चाहिए|

बवासीर को जड़ से खत्म करने के घरेलू उपाय और इलाज

Bawasir Ko Jad Se Khatam Karne Ke Upay in Hindi

बवासीर की तकलीफ जड़ से दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि कब्ज को पहले दूर किया जाये और फिर उसे कभी न होने दिया जाये| कब्ज दूर करने का निश्चित उपाय ऊपर दिया जा चुका है| पुराना बवासीर सारे शरीर कि स्थिति के सुधार होने पर ही जाता है|

  1. बवासीर के रोगी की आंतें बहुत कमजोर हो जाती है| अत: आरम्भ में उसे ऐसे खाघ पदार्थ देने चाहिए जिनसे कब्ज तो दूर हो ही, साथ ही साथ मल भी इतना मुलायम बने कि वह बिना तकलीफ दिये गुदा मार्ग से बाहर हो जाये|
  2. आहार में यथासम्भव सलाद, सरदार फल या उसका रस और तरकारी या उसके सूप की अधिकता हो जिसमें ऊपर से पानी मिलाने या पीने की आवश्यकता न हो| इससे विशेष लाभ यह है कि तरल पदार्थ शुद्ध रूप में प्राप्त हो जाता है| इस प्रकार के आहार कुछ दिनों तक चलाते रहने पर रोग उत्पन्न करने वाली स्थिति बहुत कुछ दूर हो जायेगी और यदि रोग आरम्भिक अवस्था में होगा तो वह भी अच्छा हो जायेगा|
  3. ऐसे भोजन पर रहते हुये भी यदि पाखाना ढीला न होने लगे तो स्थिति में काफी सुधार होने तक प्रतिदिन दो या तीन बार एनिमा लेना चाहिये, पहले गुनगुने पानी का, उसके बाद ठंडे पानी का| एनिमा के पानी में नींबू का 8 से 10 बूंद रस जरूर मिला लेना चाहिये|
  4. सायं काल सोते समय 100 ग्राम पानी या 50 ग्राम नारियल के तेल का एनिमा नींबू के 25 ग्राम रस सहित लेकर रातभर रोक रखना चाहिये| इससे बड़ी आंत के पर्दे को ठंडक पहुंचेगी और मल भी ढीला पड़ जायेगा|
  5. सायंकाल के रोक रखने वाले एनीमा के साथ साथ पेडू जंघा और कटि-प्रदेश पर ऊनी कपड़े का पैक रातभर के लिए देकर गर्मी पहुंचाने की कोशिश होनी चाहिये| अगर इन उपचारों के बावजूद भी मलत्याग में कष्ट हो तो गर्म और ठंडे पानी का कटिस्नान करने की व्यवस्था करनी चाहिये|
  6. तीन मिनट गर्म पानी में बैठने के बाद एक मिनट ठंडे पानी में बैठना क्रमश: चलना चाहिये और गर्म पानी में बैठने समय पैरों को एक पात्र में रखे हुए गर्म पानी में रखना चाहिये| इस स्नानों के बाद ठंडे जल से सारे शरीर का स्नान कर सूखी तौलिया से रगड़कर बदन को सुखा लेना चाहिये और तब बिस्तर पर लेटकर विश्राम करना चाहिये|
  7. गेहूं का दलिया, चोकर समेत आटे की रोटी, गूलर, पालक, बथुआ, तोरई, परवल, मूली, पत्तागोभी, हरा पपीता आदि सभी हरी शाक भाजियां पका पपीता, पका बेल, पका केला, खरबूजा, सेव, नाशपाती, मट्ठा, दूध, किशमिश, मुनक्का, आलू बुखारा, अंजीर, तथा पका या कच्चा नारियल आदि| दालें और उन्तेजक खाघ पदार्थ एकदम त्याग देना चाहिये|
  8. पुराने बवासीर में, जिसमें आंतों की गर्मी के कारण मल कड़ा पड़ जाता है, कुछ दिनों तक प्रत्येक भोजन के साथ 3 ग्राम की मात्रा से ईसबगोल की भूसी उपयोग करना चाहिये| ईसबगोल का इस्तेमाल करने से पहले उसे बीस गुने वजन के पानी में 12 से 24 घंटे तक ठंडे पानी में भिगो रखना चाहिये| जब पेट साफ होने लगे तो ईसबगोल की मात्रा कम करते हुए उसका प्रयोग बंद कर देना चाहिये|
  9. पुराने बवासीर में कब्ज को मिटाने और शरीर के विकार को दूर करने के लिए तीन से पांच दिनों का उपवास दोनों समय एनिमा के साथ अत्यावश्यक है| उपवास के दिनों में सिर्फ नारंगी या कागजी नींबू का रस दिन में दो-दो घंटे पर लेना चाहिये| उपवास तोड़ने के बाद कुछ दिनों तक फलाहार करना चाहिये| उसके बाद एक समय रोटी सब्जी और दूसरे समय फलाहार करना चाहिये| तत्पश्चातृ धीरे-धीरे सादे भोजन पर आना चाहिये|
  10. प्रतिदिन सुबह-शाम 15 से 30 मिनट तक मस्सों पर भाप देने के बाद कटि स्नान लेना चाहिये, या पहले 3 से 5 मिनट तक गरम जल से भरे पानी के टब में कटि स्नान लेने के बाद तुरंत 30 से 60 सेकण्ड तक ठंडे जल से भरे पानी के टब में वही स्नान लेना चाहिये|
  11. उसके बाद रजाई ओढ़ कर गर्मी लाना चाहिये| इसे दिन में दोबार अवश्य करना चाहिये| जुस्ट का प्राक्रतिक स्नान भी प्रतिदिन सुबह-शाम करना चाहिये, या सबेरे नास्ता के 1-1/2-2 घंटा पहले और शाम को भोजन के दो घंटे पहले-डेढ़ किलो मिट्टी ठंडे पानी से सान कर और उसमें आधे कागजी नींबू का रस निचोड़ कर नाभि के नीचे मूत्रेन्द्रिय तक एक कोख से दूसरे कोख तक फैला लेनी चाहिये और लगभग आधा किलो मिट्टी गेंद सी बना कर लंगोट के सहारे गुदा द्रार पर बांध लेनी चाहिये| आधे घंटे बाद मिट्टी को हटा-कर शक्ति होने पर 4-5 किलोमीटर टहल लेना चाहिये|
  12. खूनी बवासीर में हरी बोतल के सूर्य तत्प जल की 4 ख़ुराकें और वादी बवासीर में नारंगी रंग की बोतल के जल की उतनी जी ख़ुराकें 50-50 ग्राम की मात्रा से लेनी चाहिये|
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बवासीर के मस्से का जड़ से इलाज – Bawasir Ke Masse ka ilaj in Hindi

  • बवासीर के मस्से को जड़ से हटाने के लिए सेहुंड़ के दूध में थोड़ी हल्दी मिलकर इसे 1 बूंद को मस्से पर लगाये मस्से पर लगाने से मस्से सूखने लगेगा और हल्के-हल्के जड़ से खत्म हो जाएगा|
  • बवासीर के मस्सों को हटाने के उपाय में नीम का तेल और हल्दी कड़वी तोरई के रस में मिला कर मस्सों पर लगाये| इस घरेलू उपाय को सही तरीके से करने पर मस्से जड़ से खत्म होने लगेंगे|
  • बवासीर के मस्सों से छुटकारा पाना चाहते है तो आक के पत्तों और सहजन के पत्ते का मलहम बना ले और इसे मस्सों पर लगाए बवासीर के मस्सों को हटाने के लिए यह उपाय बहुत ही कारगर है|
  • 40 ग्राम अफीम पीस कर व 20 ग्राम निलाथोथा 40 ग्राम सरसों के तेल में पका लें| हर रोज सुबह-शाम इसे रुई की मदद से आप अपने मस्सों पर लगाये कुछ ही दिनों में बवासीर के मस्से सूखने लगेंगे और बवासीर के मस्से जड़ से खत्म होने लगेंगे|
  • बवासीर के मस्सों को जड़ से सूखने के उपाय में 1 चम्मच शहद और 2 चम्मच गाय का घी मिला कर मस्सों पर लगाए| कुछ दिनों इस उपाय को करने के बाद बवासीर के मस्से सूख कर गिरने लगेगा|
  • थोड़ा सा कपूर डालकर और नीम के पत्ते घी में थोड़ा सा पका कर इसकी टिकिया बना लें| हर रोज 1 टिकिया गुदाद्वार पर बांधने पर मस्से जड़ से खत्म होने लगते है यह घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद होता है|
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