दमा रोग का होम्योपैथिक इलाज

यह रोग काफी घातक होता है| इस रोग के लिए लोग यहां तक कह देते है| कि दमा दम के साथ जाता है| यानी यह रोग लाइलाज है| और सारी सारी जिन्दगी शरीर में डेरा डाले रहता है| दमे का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि रोगी का चलते-चलते किसी रुकावट के कारण श्वास फूलने लगे तो इसी को दमा कहते है| सबसे पहले चिकित्सक को इस रोग के कारणों को जानना बहुत ही जरूरी होता है| यह रोग वैसे तो खांसी का एक ही अंग है| फिर भी फेफड़ों के कोष्ठों में श्लेष्मायुक्त पदार्थ जम जाने के कारण कोष्ठों में सूजन के आ जाने की वजह से दमा जैसी खतरनाक रोग पैदा होता है| इस लिए आज हम दमा रोग के कारण और होम्योपैथिक इलाज के बारे में बात करेंगे तो चलिये जानते है दमा के कारण और इलाज क्या है|

दमा तेजी के साथ प्रकट होता है| काफी समय तक कष्ट देने के पश्चात इसकी गति अपने आप धीमी पड़ जाती है| जब इसकी गति धीमी होती है तो सांस लेने एव छोड़ने में काफी कष्ट महसूस होता है| खांसते-खांसते रोगी का बुरा हाल हो जाता है| अंत में जब फेफड़ों में फंसा सफेद रंग का बलगम बाहर निकल जाता है| तो रोगी को कुछ शांति मिलती है|

दमा के कारण – Causes of asthma

जब भी खांसी का रोग अधिक बढ़ेगा, तभी रोगी को सांस लेने में काफी कष्ट महसूस होगा| जब दमा भयंकर रूप धारण कर लेता है| तो ऐसी हालत में साधारण दवाएं भी असर नहीं दिखा पातीं| कई रोगी तो दमे के दौरे के कारण तीन-तीन दिन तक कष्ट भोगते है| इससे शरीर में थकावट, दर्द के साथ-साथ शरीर में जल की कमी भी आ जाती है, इससे शरीर नीला पड़ना आरंभ हो जाता है, जिकसा प्रभाव श्वास की नली पर पड़ता है| उसमें जहर पैदा होने लगता है| इसके साथ ही शरीर में ऑक्सिजन की कमी आ जाती है| यदि रोगी का इलाज समय पर न हो तो उसकी मृत्यु भी हो जाती है|

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यह रोग फेफड़ों से आरंभ होकर पूरे शरीर के लिए जानलेवा बन जाता है| यह बात ध्यान रहे कि कोई भी डॉंक्टर कभी रोगी को यह बात नहीं कहता कि तुम ठीक नहीं हो पाओगे, वह तो यही कहेगा कि अरे चिंता की क्या बात है| यह लो दवाई और कल तक ठीक हो जाओगे| घबराओ मत| मै समझता हूं| अच्छे डॉंक्टर का यह पहला कर्तव्य है कि वह रोगी को दु:ख का अहसास तक न होने दे| रोगी को मनोवैज्ञानिक तरीके से चलाने से उसके आधे रोग अपने आप समाप्त हो जाते है, इसलिए रोगी को पहले से ही यह न कहें की यह रोग लाइलाज है| यह तो दमे की बात है| एलोपैथी वाले जिन रोगों से हार मान लेते है, होम्योपैथी वाले उन्हीं पर वियज प्राप्त करके यह सिद्ध कर देते है कि हमारे पास हर रोग का इलाज है|

दमा के उपचार – Asthma treatment

हर डॉंक्टर को रोग के लक्षणों को देखते हुए ही इस रोग का उपचार करना चाहिए| नीचे लिखी दवाओं में से कोई भी दवा चुन सकते है|

अरेलिया रोसिमोसा – जिस रोगी को आधी रात के समय खांसी आने लगे, सोते समय सारा शरीर पसीने में डूब जाए, नींद आते ही जोर की खांसी उठे| गला दर्द करे तो इन लक्षणों के आधार पर रोगी को इस दवा का मूल अर्क (मदर टिंक्चर) अथवा 6 शक्ति को अर्क टिंक्चर लेना चाहिए| आधे कप पानी में 5-6 बूंदें दवा डालकर 1-1 चम्मच दवा दो-दो घंटे के बाद लेते रहें|

एकोनाइट -30 – यह काफी प्रसिद्ध दवाई है| इसका असर रोगी पर बहुत जल्दी होता है| जब कोई दमा रोगी ठंडी हवा में या ठंड के कारण कष्ट महसूस करता है, उसे प्यास भी अधिक लगती है| और उसका शरीर खांसते-खांसते पसीने में डूब जाए तो ऐसे रोगी को एकोनाइट-30 देने से आराम मिलेगा|

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ग्रिडेलिया नींद आते ही सांस का कष्ट होने लगे, जिसके कारण नींद न आए, रोगी लेटकर भी सांस न ले सके, मजबूर होकर उसे उठकर बैठना पड़े और खांसते-खांसते उसका बुरा हाल हो जाए, सांस उखड़े, छाती से ‘घर्र-घर्र’ की आवाज़ आए| ऐसे रोगी को इस दवा का मदर टिंक्चर आधे कप पानी में डालकर 2-2 घंटे के पश्चात सेवन करवाएं| यह दवा -30 शक्ति में दें|

इपिकाक -30 – फेफड़ों में कफ का जमाव हो जाए, दिल कच्चा होने लगे, खांसी का दौरा बार-बार उठे, घी वाला भोजन करने पर अधिक, कष्ट महसूस होता हो, साथ में जुकाम भी हो तो ऐसे रोगियों को इपिकाक-30 का सेवन करना चाहिए| यह दवा गोलियों के रूप में लें| 8-10 गोली दो-दो घंटे के पश्चात मुंह में रखकर चूसते रहें, परन्तु जैसे ही रोग से छुटकारा मिले, दवाई बंद कर दें| बच्चों के लिए दवाई की मात्रा आधी कर दें|

एंटिमटार्ट -30 सांस के रोगियों के लिए यह एक विशेष और गुणकारी दवा मानी जाती है| खासकर ऐसे रोगी जिसके फेफड़ों में कफ अधिक मात्रा में जम जाता है, वे खांसते हुए तड़पने लगते है| निरंतर खांसते रहने से उसका शरीर कमजोर हो जाता है, जिसके कारण वे कोई काम नहीं कर पाते| ऐसे रोगियों के लिए एंटिमटार्ट -30 की 8-10 गोलियां 3-3 घंटे के पश्चात देते रहें| यह गोलियां चूसने के लिया है| चबाकर नहीं खाना चाहिए|

ब्लाटा और Q मैंने कुछ ऐसे भी दमा रोगी देखे हैं, जिनके शरीर अति शक्तिशाली होते हुए भी उन्हें दमा रोग होता है| यह रोग भी फेफड़ों का रोग कहा जा सकता है| ऐसे रोगियों को ब्लाटा और का मूल अर्क देना चाहिये|

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दमा रोगी की प्रारंभिक अवस्था में कुछ उपयोगी दवाएं – Some useful medicines in the early stages of asthma patients

हाइड्रोमियानक एसिड -3x यह केवल नए रोगियों के लिए ही है|

ब्लैता ओरियैप्टलिस-0.3x जिन दमा रोगियों को खांसी के साथ पीला कफ आता हो, उनके लिए अति लाभदायक है|

कार्बबिज : यह दवा भी दमा रोगी में लाभकारी होती है| जिस दमा रोगी के चेहरे पर ठंडा पसीना आता हो, शरीर में सुस्ती, नाक-कान तथा पांव ठंडे होकर इनमें सूजन आ जाए तो ऐसे रोगियों को यह दवाई दें, इससे लाभ होगा|

इसके अतिरिक्त कार्बबिज 6-200, कास्टिकम -30-200, लोबेलिया Q-6, ऐरालिया रेसिसोसा -Q-3, केलीक्यूर 3x-30, केलीफस 3x-6x, केलीकार्ब 30-20, सेनेगा Q.

यह संब दवाएं दमा रोगियों के लिए अति उपयोगी हैं| इन दवाओं के इस्तेमाल से दमा रोग का जड़ से नाश हो जाता है|

हेल्लो दोस्तों दमा रोग का होम्योपैथिक इलाज यह पोस्ट आप को कैसी लगी हमे कमेन्ट करें और अपने दोस्तों के साथ शयेर करें |

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