दुबले पतले शरीर को मोटा करने के 5 आसान तरीके और उपाय इन हिन्दी

शरीर की आयु और लम्बाई के अनुपात से अपेक्षाक्रत जब वजन बहुत कम होता है| तभी दुबलापन या क्रश्ता कहा जाता है| बचपन से-इस प्रकार का दुबलापन स्वास्थ्य के लिए अनुकूल होते है| रोग के कारण-ऐसे लोगों का शरीर दूषित पदार्थो का संग्रहालय ही होता है| इसी कारण शरीर दुबला-पतला बना रहता है| अभी हाल में पाश्चात्य स्वास्थ्य-विशेषज्ञों ने जो रिसर्च इस सम्बन्ध में की है, उससे पता चलता है कि कोई आदमी मोटा या पतला क्यों होता है? इसका कारण मानव-शरीर स्थित कुछ किटाणुओं की रासायनिक क्रिया है|

जिसकी गति ‘थाइराइड ग्लाण्ड’ अर्थातृ गले के पास की उस गिल्टी पर जिससे शरीर की गर्मी बढ़ती है तथा अस्थियों की व्रद्धि में योग मिलता है, निर्भर है| यह गिल्टी-विशेष जिस मनुष्य में जितनी ही दुर्बल और छोटी होगी, वह उतना ही कमजोर और पतला बना रहेगा और इसके विपरीत जिस मनुष्य की यह गिल्टी स्वास्थ्य और मोटी होगी वह उतना ही सबल और मोटा होगा|

‘थाइरायड ग्लाण्ड’ के लिए पोषण तत्व ‘आयोडीन’ वाले पदार्थों में अधिक पाये जाते है और आयोडीन अधिक मात्रा में पाया जाता है ताजी हरी सब्जियों में| इसलिए उन लोगों को उन्हें मोटा होने की उत्सुकता है ताजी हरी तरकारियां कच्ची या पकाकर बहुतायत से खानी चाहिये| इस सम्बन्ध में यह ध्यान रहे कि ऐसी तरकारियों में मिर्च-मसालों का अधिक समावेश न होना पाये और वे अधिक पकाई भी न जाये अन्यथा आशातीत सफलता प्राप्त होने में सन्देह की गुंजाइश है| आधे पके मीठे फलों में भी आयोडीन अधिक मात्रा में पाया जाता है इसलिए अभीष्ट सिद्धि के लिये ताजे फलों का भी सेवन अनिवार्य होना चाहिये|

दलों से भी मोटाई बढ़ती है| और विशेषकर उन दालों से जो छिलका समेत व्यवहार में लाई जाती है| जैसे उरद की दाल, दूध, घी, तेल आदि मोटापा बढ़ाने वाली वस्तुओं से भी मोटाई बढ़ाई जा सकती है| और बहुत आसानी से, किन्तु वह मोटाई किसी काम की नहीं होग| इससे शरीर भद्दा बन जाने के अतिरिक्त बहुधा बेकाम भी हो जाता है| अधिक दूध, घी सेवन करने से मनुष्य में इसी प्रकार की मोटाई अधिक देखने को मिलती है| ऐसी मोटाई तो एक प्रकार की बीमारी ही है, जी समान्यतया आराम तलब लोगों को अधिक सताती है| यह बीमारी शरीर में अधिक चर्बी इकट्टी हो जाने से ही होती है जो उत्तम स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है|

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यदि मोटाई अप्राक्रतिक है अर्थातृ अनावश्यक चर्बी चढ़ जाने से है तो व्यायाम द्धारा वह विजातीय चर्बी धीरे-धीरे छट जायेगी और शरीर पतला तथा हल्का-फुल्का निकल आयेगा और व्यायाम से मोटाई बढ़ने का यह तत्पर्य है कि व्यायाम के प्रभाव से शरीर के अंग प्रत्यंग सजीव हो उठते है| उनकी शिथिलता मिट जाती है और प्रत्येक अवयव अपना कार्य सुचारु रूप से करने लगता है| जिसका फल यह होता है कि मनुष्य को स्वभावत: जितना मोटा होना चाहिये उतना वह हुये बिना नहीं रहता|

व्यायाम से मनुष्य का शरीर सुडौल, सुन्दर तथा स्वस्थ तो बनता ही है, साथ ही साथ उसके असाधारण प्रभाव से मनुष्य की पाचन क्रिया भी अति तीव्र हो जाती है, जिससे जो कुछ भी खाया जाता है पच जाता है और भोजन पच जाने का अर्थ है स्वास्थ्योन्नति| मगर यह ध्यान रहे कि मोटा होने के लिये अधिक व्यायाम बिलकुल व्यर्थ है और कभी-कभी उल्टी भी सिद्ध हो सकता है| इसलिये व्यायाम थोड़ा किन्तु नियमित रूप से होना चाहिये| जिससे थकावट व पैदा होकर चिन्त को प्रसन्नता प्राप्त हो|

फिक्र और चिन्ता भी शरीर के मोटे होने में कम बाधक नहीं होते| एक मनुष्य जो चिन्ताओं के वशीभूत है कभी मोटा हो नहीं सकता| किन्तु इसके विपरीत जो व्यक्ति सब प्रकार की चिंताओं से मुक्त है उसका तीर्थ स्थान के सांडों की भांति मोटे होते चले जाना अनिवार्य है| शरीर के प्रत्येक अवयव की विधिवतृ मालिश करने से भी मनुष्य मोटा होता देखा गया है| पहलवानों का शरीर जो सुडौल और भरा हुआ दिखाई देता है वह व्यायाम के साथ-साथ नियमित मालिश का ही फल होता है|

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किसी व्यक्ति विशेष का मोटा अथवा पतला होना उसके स्वभाव, व्यायाम तथा उसकी सामाजिक मनोवृन्ति पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है| सेठ, महाजन विशेष कर मारवाड़ी समाज में आपको बिरले ही पतले दिखाई देंगे| किन्तु परिश्रमी खेतिहर किसानों में कठिनाई से कोई सौ में एक मोटा किसान तलाश करने पर मिलेगा| मोटा होने के इच्छुक को यह बात भी न भूलनी चाहिये कि किसी भी अवस्था में यदि मनुष्य प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में निद्रा-सुख| भागेगा तो उसके समग्र मोटा होने के साधन उपस्थित रहने पर भी वह कदापि मोटा नहीं हो सकता| क्यूंकि यह स्वयं सिद्ध है कि मीठी नींद और शरीरोन्नति में चोली और दामन का साथ होता है|

मोटे होने के तरीके : Weight Increase Tips in Hindi

दो-तीन दिनों तक केवल फल पर रहना चाहिये| फलों के साथ दिन भर में 50-75 ग्राम चोकर भी खाना चाहिये जिससे कब्ज न हो| चोकर मीठे फलों में मिलाकर या फल के जूस में घोलकर या पपीता जैसे फलों के गूदे के साथ अत्याधिक लेना चाहिये| फलाहार का जूस से भूख अधिक लगेगी, पाचन शक्ति तीव्र होगी| फलाहार के बाद अक्सर भोजन सवाया हो जाता है और किसी-किसी का ड़यौढ़ा भी| जो अधिक नहीं खा पाते उनका भी वजन उतने ही भोजन से बढ़ता है क्यूंकि फलाहार के कारण भोजन का अभिशोषण अच्छा होने लगता है| शाक-सब्जियों का जूस व सूप भी उपयोगी रहता है| जिनका भोजन डेढ़ गुना हो जाता है उनका वजन तो एक किलो प्रति सप्ताह तक बढ़ा है|

आटा, चावल, मीठा, किशमिश, मुनक्का, अंजीर, खजूर तथा सभी चिकनाइयाँ, वजन बढ़ाने वाले खाध पदाथों में सर्वश्रेष्ठ हैं| आरम्भ के कुछ दिनों में तो चिकनाई की वनिस्वत श्वेतासार अधिक वजन बढ़ाता है| यदि 50-50 ग्राम चिकनाई अधिक खाई जायेगी तो 50-50 ग्राम ही वजन बढ़ेगा, पर यदि 50 ग्राम श्वेतसार या मीठा अधिक खाया जायेगा तो वजन 200 ग्राम बढ़ेगा| अधिक खाने के अर्थ को यहाँ समझ लेना चाहिये| अधिक खाना, अर्थातृ उतने से अधिक खाना जितने भोजन से वजन न घटे बल्कि टिका रहे|

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वजन बढ़ाने के लिए मांस का सर्वथा त्याग कर देना चाहिये| अंकुरित गेहूं की दलिया वजन बढ़ाने के लिए बड़ी उपयोगी सिद्ध हुई है| अंकुरित गेहूं को सिलपर पीसकर दूध में या सादा ही पकाकर खाया जा सकता है| वजन बढ़ाने के लिए सबेरे उठते ही, रात को सोते समय, तथा भोजन के दो घंटे बाद या पहले थोड़ा-थोड़ा करके काफी पानी पीना चाहिये| हल्के व्यायाम और टहलना भी वजन बढ़ाने में सहायक होते है| उपर्युक्त विधि से महीने में डेढ़-दो किलो वजन आसानी से बढ़ जाता है| यदि महीने के अन्दर ही निश्चयपूर्वक तीन-चार किलो वजन बढ़ाना हो तो दूध कल्प करना चाहिये| इसके साथ इस रोग की चिकित्सा भी वही है जो पेटूपन रोग की|

मोटे होने के घरेलू उपाय : Mota Hone Ke Gharelu Upay

  1. जितना केले खा सकें खाएं और दूध पीएं| अथवा प्रात: सायं दो-दो केले खाकर 1-1 गिलास दूध लें| इससे न केवल मोटापा ही बढ़ता है, बल्कि शारीरिक बलिष्ठता भी बढ़ती है|
  2. पौष्टिक पदार्थ लें और व्यायाम करें|
  3. मक्खन, दही-दूध, रबड़ी आदि का सेवन करें|
  4. आधा लीटर दूध में 250 ग्राम जलेबी भिगोकर रख दें तथा 20-25 मिनट व्यायाम करने के पश्चात उसका सेवन करें|
  5. मात्र नीबू व पानी का अधिक सेवन करने से मोटापा बढ़ता है|
  6. चर्बी बढ़ाने वाले पदार्थों जैसे घी, तेल, मलाई, मक्खन आदि का सेवन करें|

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