जानलेवा हैजा के कारण और उपचार होम्योपैथिक इलाज

जानलेवा हैजा एक संक्रामक बीमारी है जब यह बीमारी किसी को भी होती है तो यह बीमारी उसकी जान ले कर ही छोड़ती है ये बीमारी किसी को भी हो सकती है इस लिए आज हम जानलेवा हैजा के करण और उनके उपचार के बारे में बात करेंगे तो चलिए जानते है | जानलेवा हैजा क्या है यह किस कारण से होता है और इसका इलाज क्या है |

जानलेवा हैजा क्या है – What is a fatal cholera

हैजा पेट के रोगों में खतरनाक और जानलेवा होता है | कई बार तो हैजा के प्रकोप से हजारों लोगों की मौतें भी हो चुकी है | यह विनाशकारी रोग जब फैलता है तो ज्यादातर मौत का ही संदेश लाता है |

हैजा रोग के कारण – Causes of cholera disease

अधिकतर यह रोग गंदे फल, बासी सब्जियां, अशुद्ध भोजन, जो खुला रखा होता है तथा उस पर मक्खियां बैठी रहती है, के खाने से, गंदा पानी पिने, गंदे हाथों से भोजन करने से होता है | घरों में या बाहर गंदे बर्तनों में खाना बनाने के कारण भी यह रोग फैलता है |

हैजा रोगी की पहचान – Identification of cholera patient

सबसे पहले पेट में दर्द उठता है | दिल मिचलाने लगता है | फर दस्त आने लगते है | रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर के पश्चात शौच जाना पड़ता है | इसके साथ ही उल्टियां आरंभ हो जाती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है यह स्तिथि बहुत भयंकर मानी जाती है | ऐसे रोगी को  यदि समय पर डॉक्टरी सहायता न मिले तो उसकी मृत्यु भी हो जाती है इसीलिए हैजे के लक्षण देखते ही उसके उपचार की ओर ध्यान देना चाहिए |

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हैजा रोग के उपचार – Treatment of cholera disease

  • रोगी को समय पर इलाज करके उसे मौत से बचाया जा सकता है |
  • इस रोग में जल्द ही डॉक्टर से मिलकर राय-मशफरा करना चाहिए और डॉक्टर के अनुसार रोगी को उचित दवाइयाँ देनी चाहिये और साथ ही सुझाव के अनुसार उचित खाद्य सामग्री देनी चाहिये |
  • रोगी व्यक्ति को नमक चीनी का घोल मुँह के द्वारा बार-बार देना चाहिये |

हैजा का इलाज – Treatment of cholera

हैजे से बचने के लिए ओ. आर. टी. ( ओरल रिहाइड्रेशन थैरेपी ) तथा उचित जीवाणुनाशक दवाई काफी होती है | यह दवा आप अपने घर पर ही बड़ी आसानी से बना सकते है |

  • एक गिलास सादा पानी |
  • एक चुटकी नमक |
  • दो से तीन टेबल स्पून ( चम्मच ) चीनी |

इन सब चीजों को मिलाकर घोल कर तैयार कर लें | यह हैजे के रोगियों के लिए सबसे बढ़िया देसी नुस्खा है | इसे आप सफर में भी ले जा सकते हैं | इस घोल की खुराक इस प्रकार है –

  1. 4 मास से कम आयु के बच्चों के लिए 200 से 400 मि. ली.|
  2. 4 से 11 मास तक के बच्चों के लिए 400 से 600 मि. ली.|
  3. 1 से 4 वर्ष तक के बच्चों के लिए 600 से 1200 मि. ली.|
  4. 5 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए 1200 से 2200 मि. ली.|
  5. 14 से ऊपर आयु वालों के लिए 2200 से 4000 मि. ली.|

एक खुराक देने के पश्चात् उसे कुछ खाने को दें| इसके बाद हर तीन घंटे के पश्चात् एक-एक खुराक देते रहें | जब हैजा रोग हद से ज्यादा बढ़ जाए और थोड़े-थोड़े समय के  पश्चात् ही रोगी को शौच के लिए जाना पड़े, पेट में जोर का दर्द हो, साथ ही उल्टियां आने लगें तो ” क्यूफिया ” के मूल अर्क की 5 बूदें एवं बड़ों के लिए 10 बूंदें पिलाने से रोगी को काफी लाभ होता है | इस दवाई को दिन में चार बार पिलाने से रोगी को आशातीत लाभ होगा |

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हैजा रोग में निम्न दवाएं भी लाभकारी होती है-

आर्सेनिक अल्बम ( Arsenic album ) – हैजा रोगी के लिए यह दवा भी काफी लाभदायक है | विशेषरूप से जब हैजे का प्रकोप बहुत बढ़ जाए तो यह दवा बहुत जल्द लाभ पहुंचाती है |

वीटेम एलबम ( Vetem album ) – हैजा रोगी को जब प्यास अधिक लगती हो, मगर जैसे ही रोगी पानी पीता है, उसे उसी समय उल्टी आ जाती हो, उसका शरीर टूट चूका हो, कमज़ोरी के कारण वह चारपाई से उठ न सकता हो, ऐसे अवसर पर पहले रोगी को 30 शक्ति की दवा दें जब तीन-चार खुराक 30 शक्ति की रोगी ले ले तो उसको 200 शक्ति की खुराक देते रहें |

एयूजा  Euja )– बच्चे को दूध हज़म न होता हो, लगातार दस्त आते हो, उल्टी करता हो, मुंह से कुछ नहीं कह पाता हो, और रोता हो तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है | इससे सारे घर वाले बेचैन हो जाता है | ऐसे बच्चों के लिए 30 से 40 शक्ति की एक गोली दिन में तीन बार चार दिन तक खिलाते रहने से इस रोग की जड़ ही कट जाती है |

कल्केरिया फाँस ( Cuckaceous fascia )– बच्चे के दांत  निकलने में जब कष्ट होता है तो उसका पेट खराब हो जाता है ऐसे में दस्त और उल्टी तो आम रोग बनकर रह जाते है | इससे बच्चे काफी कमजोर हो जाते है | ऐसे में आपको कल्केरिया फांस – 30 दवाई देना चाहिए |

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