उच्‍च रक्‍तचाप (हाइपरटेंशन)

जब आप का ब्लडप्रेशर सामान्य स्तर अर्थात 120/80 से बढ़ कर 140/90 हो जाता है तो यह नि:संदेह चिंता का विषय है, इस स्तर से और अधिक रक्तचाप बढ़ने पर उसका इलाज आवश्यक है| क्योंकि यथासमय उचित उपचार नहीं किया गया तो मस्तिष्क में रक्तस्त्राव, लकवा, अचेतावस्था, कोमा यहां तक कि मृत्यु की भी संभावना बढ़ जाती है, अतएव रक्तचाप को समान्य बनाए रखने के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें: इस लिए आज हम हाईब्लड प्रशर के कारण और इलाज के बारें में बात करेंगे तो चलिये जानते है हाईब्लड प्रेशर के कारण और इलाज क्या है|

हाई ब्लड मे वजन कम करें – Lose weight in high blood

देखा गया है| कि समान्य वजन के व्यक्ति की तुलना, में मोटे व्यक्ति को उच्च रक्तचाप होने के अवसर कहीं अधिक हैं, थोड़ा-सा भी वजन कम होने पर ब्लडप्रेशर में पर्याप्त कमी आ जाती है, अत: ह्रदयरोग विशेषज्ञ वजन घटाने का भी निर्देश देते हैं, इसके लिए योगाभ्यास एव प्रात: लगभग 4-5 किलोमीटर तेजी से चलना सर्वोत्तम है|

पूर्व में मान्यता थी कि चना, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि गरीबों का अनाज है किन्तु आजकल इन्हें खाने की सलाह अमीरों को भी दी जाती है, इसके 2 मुख्य लाभ हैं, कम कैलारी और अधिक रेशे होना, इन्हें खाने से पेट तो भरता है किन्तु शरीर को भी कम ऊर्जा मिलती है, इसके साथ ही इसमें पाए जाने वाले रेशे कब्ज रोकने एव पाचनशक्ति बढ़ाने में सहायक होते है| इसके साथ ही मौसमी, फल, कच्ची हरी सब्जियां जैसे ककड़ी, गाजर, मूली, टमाटर, अधिक खाएं व तेल, घी, मक्खन, का कम से कम प्रयोग करें|

विभित्र भोज्य पदार्थो का प्रभाव – Impact of food items in the vessel

रक्तचाप को समान्य रखने के लिए सही आहार का सेवन आवश्यक है क्योंकि यह वजन को कम करने के साथ-साथ रक्तचाप को भी कम करने में सहायक होता है|

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लहसुन के फायदे – Benefits of garlic

Lehsun रक्त नलिकाओं को फैलाने में सहायक होता है, अत: इसके द्धारा ब्लडप्रेशर कम हो जाता है, लहसुन में पाया जाने वाला एडीनोसीन नामक तत्त्व मांसपेशियों को ढीला कर देता है, जिससे रक्त नलिकाएं फैल जाती है| यघपि कच्चा या पका हुआ लहसुन दोनों ही असरदार हैं, किन्तु कच्चा लहसुन ज्यादा प्रभावशाली होता है| प्रतिदिन लहसुन की 3-4 कलियों को बारीक काटकर हलके गरम पानी के साथ निगला जा सकता है या उसकी चटनी पीसकर खाई जा सकती है|

लहसुन रक्त में कोलेस्ट्राल की मात्रा को कम करता है, यह रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को रोकता है, इससे ह्रदयाघात होने के अवसर कम हो जाते है, यह पेट की गैस एव छालों को भी रोकता है तथा आंतों के कैंसर से भी बचाव करता है, लहसुन शरीर में बीमारी और संक्रमण से बचने की प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है|

फल और कच्ची सब्जियां के फायदे – Benefits of Fruits and Raw Vegetables

ताजा फल और सब्जियों में पोटैशियम की अधिक मात्रा एव सोडियम की अपेक्षाक्रत कम मात्रा पाई जाती है, जो उच्च रक्तचाप में फायदेमंद हैं, इनमें, विटामिन-सी एव रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो रक्तचाप कम करने में सहायक होते हैं, आमतौर पर देखा गया है कि जो लोग कम विटामिन-सी युक्त पदार्थो का सेवन करते हैं, उनका रक्तचाप अधिक होता है, विटामिन -सी संतरा, आंवला, अमरूद, नींबू, टमाटर, पत्तागोभी आदि में अधिक मात्रा में पाया जाता है|

पोटैशियम – Potassium

पोटैशियम रक्तचाप को कम करने में सहायक होता है, यदि भोजन में निरंतर पोटैशियम की मात्रा कम होता जाए तो रक्तचाप बढ़ने की संभावना समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ जाती है, पोटैशियम की कमी से ब्लड प्रेशर 4-5 मि॰मी तक बढ़ सकता है| केला पोटैशियम का सबसे अच्छा और रास्ता स्त्रोत है, इसके अतिरित्त संतरे, पालक, मलाईरहित दूध, सोयाबीन और बादाम में भी पोटैशियम पाया जाता है, 1 किलोग्राम सोयाबीन की दाल को 9 किलोग्राम गेहूं के साथ पीसकर आटे के रूप में सुविधापूर्वक प्रयोग किया जा सकता है, साबूत सोयाबीन को पीसने पर कड़वाहट महसूस हो सकती है, अत: सोयाबीन को रात में भिगोकर, सुखाकर व उसका छिलका निकाल कर पिसवाए |

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आटे को बिना छाने और बिना चोकर निकाले खाना लाभदायक रहता है क्योंकि गेहूं की बाहरी परत में पौष्टिक तत्व रहते हैं| आजकल बाजार में विशेष प्रकार के नमन उपलब्ध हैं, जिनमें सोडियम व पोटैशियम 1:3 के अनुपात में रहता है|

कैल्सियम – Calcium

विशेषज्ञों की राय है कि ऊंचे रक्तचाप का मूल कारण कैल्सियम की कमी है न कि सोडियम की अधिकता, उनके विचार से कैल्सियमप्रधान भोज्य पदार्थो जैसी दूध, दही, पनीर, काबली चना, सोयाबीन, राजमा, मक्का, ज्वार, बाजरा, सीताफल,पालक एव अन्य हरी सब्जियां खाने से सोडियम का हानिकारक असर कम हो जाता है|

सोडियम – Sodium

जैसे मघुमेह में चीनी खाना वर्जित है, वैसे ही उच्च रक्तचाप के रोगी को सिडियम और नमक कम खाने की सलाह दी जाती है, सोडियम शरीर में अपने साथ पानी को रोकता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है| ह्रदयरोग चिकित्सकों के अनुसार, आचार और पापड़ में सोडियम बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है|

एंटी आक्सीडेंट – Anti oxidant

ह्रदय विशेषज्ञों के अनुसार एंटी आक्सीडेंट तत्व जैसे विटामिन ए, ई और सी ह्रदय एव रक्त धमनियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं, मछ्ली, लीवर, अंडे, दूध, घी, गाजर, पपीता, आम, पालक, कद्र्दू , पत्तागोभी आदि में विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है, विटामिन ई अंकुरित अनाज, ताजा हरी सब्जियां, बींस, अंडे आदि में अधिक पाया जाता है|

विटामिन ई टोकोफेरल में उपलब्ध होता है, बाजार में इसके कैप्सूल भी मिल जाते हैं, जिंक, सीलिनियम और कापर खनिज पदार्थ भी एंटी आक्सीडेंट तत्व है|

मछ्ली – fish

मछ्ली हमेशा से ह्रदय की मित्र रही है, मछ्ली का तेल ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है, यदि रक्तचाप के इलाज हेतु दवा ले रहे हैं तो सप्ताह में 2-3 बार मछ्ली खाने से दवाओं की मात्रा को कम किया जा सकता है|

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वैकल्पित चिकित्सा

आयुर्वेदिक – सर्पीना टेबलेट (हिमालय ड्रग), सपेरा (चरक), अर्जुना टेबलेट (बुन्देलखण्ड), अंर्शजन टेबलेट (अलारसिन), निदेशानुसार प्रयुक्त करें| बंसत मालती रस, शंकरबती, चन्द्रोदय रस सिन्दूर, चिन्तमाणि रस, अभ्रक रसयान एव हमदर्द की अतोरो फिन एव तियाकफिशार भी लाभदायक है| इन पर सेवन विधि एव विशेष सावधानियों का विवरण लिखा होता है|

हैम्योपैथ – रावलफिया क्यू-15 बूंद पानी में मिलाकर दिन में तीन बार, गर्भवस्था में विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें| गर्मी एव धूप से रोग बढ़ रहा हो, कनपटियों में दर्द हो तो ग्लोनांइन 6x दिन में तीन बार, चक्कर आये कोनिमन 30 दिन में तीन बार, मोटे व्यक्तियों का रक्तचाप एलियम सैटा इला क्यू-15 बूंद दिन में तीन बार, नमक खाने की इच्छा ज्यादा हो नैट्मम्यूर 200 दिन में तीन बार, बूढ़ों के लिए वैराइटा म्यूर 3x दिन में तीन बार|

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