पिंपल/मुंहासे हटाने के 10 घरेलू उपाय

इस रोग को ‘यैवन पीडिका’ एव कीलें मिकलना भी कहते है| मुंहासा युवक और युवतियों का रोग है जो लगभग 13 वर्ष की उम्र से लेकर 24-25 की उम्र तक होता है| मुंहासा प्राय: मुंह पर ही होते है, परन्तु कभी-कभी छाती कंधो और पीठ पर भी होते है| परन्तु कभी-कभी तो ये इतनी संख्या में निकलते है कि सारा चेहरा इनसे ढक जाता है| इस लिए आज हम मुहांसे के लक्षण व कारण और इलाज के बारे में बात करेंगे तो चलिये जानते है कि इसके लक्षण व कारण और इलाज क्या है|

मुहांसे एक प्रकार की फुन्सियां है जो प्राय: दो प्रकार की होती है| पहले प्रकार की वे होती है जो छोटी-छोटी फुन्सियों के रूप में प्रकट होकर  दुखती है| पकती है, और सूख जाने पर जब उसके आसपास की खाल को दबाकर उसमें की कीलें निकाल दी जाती है| तो उसमें छेद हो जाता है| जो बाद को भर जाता है| दूसरे प्रकार की मुहांसे की फुन्सियां वे होती है| जो बिना पके ही काली कील निकलने वाली होती है| इस प्रकार के मुहांसों का कारण कफ, वायु या रत्त विकार होता है|

मुहांसों के लक्षण व कारण – Acne syndrome

इस रोग का मूल कारण सदोष भोजन एव असंयमी जीवन है| सदोष भोजन से चेहरे की त्वचा आवश्यक रूप से चर्बीदार हो जाती है| जिससे वहां की तौलियां ग्रन्थियां वृद्धि पाकर फुन्सियों का रूप धारण कर लेती है, जिन्हें मुंहासें कहते है| अधिक चिकनाई, शक्कर, मांस, शराब, चाय, काफी, सिगरेट आदि मादक द्रवय, तेल की चीजें, लाल मिर्च, सफ़ेद चीनी, खटाई तथा मसाला आदि अखाघ वस्तुओं का अधिक प्रयोग करने वाले एव वासनामय जीवन बिताने वाले युवक-युवतियों में यह रोग विशेष रूप से पाया जाता है|

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कब्ज और अजीर्ण से यह रोग पनपता है| स्त्रियों में यह रोग मासिक धर्म की खराबी से भी हो सकता है| कफ, वायु एव रक्त विकार से भी मुंहासे होते है| जो बच्चे दीर्घ-काल तक माता का स्तन पान करता है, उन्हें उनकी कौमारावस्था में यह रोग हो जाता है|

मुहांसों का इलाज – Treatment of acne

चूंकि इस रोग की उत्पन्ति पेट से है, इसलिए इस रोग के रोगी को हल्का, सादा, सुपच और सप्राण भोजन जिसमें चिकनाई का भाग कम हो, सेवन करना चाहिये| भोजन में शाक भाजी, उबली तरकारी, नींबू, सन्तरा, आंगूर, अनार, सेव, नासपाती व टमाटर, गाजर, अमरूद, तथा पपीता आदि मौसम के फल, बिना छने आटे की रोटी, दही और मट्ठा आदि लेना ठीक रहेगा| दिन में दो बार फल और दो बार साधारण भोजन (मात्रा आधी ताकि फल अधिक लिया जा सके) लेना चाहिये|

इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि पेशाब साफ होता रहे, त्वचा से पसीना निकलता रहें, फेफड़े ठीक काम करते रहें तथा कब्ज कभी न होने पाये| इसके लिये सप्ताह में एक दिन अर्थात 24 घंटे का उपवास रखना चाहिये, प्रतिदिन उष:पान करना चाहिए, रोज हल्की कसरत करना चाहिए, कुछ दिनों तक दिन में एक या दो बार पेडू पर गीली मिट्टी की पट्टी 30-30 मिनट तक रखनी चाहिये तथा कब्ज की दशा में जब तक कब्ज दूर न हो जाये 24 घंटे में एक बार रोज एनिमा लेना चाहिये|

स्थानीय चिकित्सा – Local medicine

बहुत से लोग मुंह के मुंहसों को दूर करने के लिये ‘स्नो या ‘क्रीम’ का व्यवहार करते है जो गलत है| कारण देखा गया है कि इन चीजों को लगाने से मुंहासे नष्ट होने के बजाय विशेष वृद्धि पाते है| यह अलग बात है कि स्नो या क्रीम में किसी चर्म रोगनाशक दवा का सम्मिश्रण होने से आरम्भ में वे योग मुंहासों पर कुछ लाभप्रद सिद्ध हो, किन्तु वास्तव में उसे की अपेक्षा हानि ही अधिक होती है|

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मुंहासे के लिए स्थानीय प्रयोग लाभदायक होते है – Local use for acne is beneficial

  1. किसी चौड़े मुंह वाले बर्तन में पानी भर कर आग पर रख दें| जब भाप निकलने लगे तो उसे आग पर से उतार कर 10-15 मिनट तक चेहरे पर भाप लें| उसके बाद मुलायम तौलिया से चेहरे को धीरे-धीरे रगड़ कर साफ करें फिर शीतल जल से चेहरे को धो डालें| यह प्रयोग प्रति दूसरे दिन करना चाहिये|
  2. अल्ट्रावायलेट किरणें इस रोग के लिए अत्यन्त लाभप्रद है| प्रत: कालीन सूर्य की किरणें अल्ट्रावायलेट होती है| नित्य नियमपूर्वक सूर्येदय के समय पूर्वाभिमुख बैठकर सूर्य की किरणें अपने चेहरे पर लेनी चाहिये| कुछ दिनों तक इस प्रयोग के करने से अवश्य लाभ होगा| जो लोग किसी कारण से प्रत:कालीन सूर्य की रश्मियों से लाभ नहीं उठा सकते, उन्हें अपने घर में बैठे-बैठे अपने चेहरे पर नीले शीशे के बीच से गुजार कर नीली रोशनी लेनी चाहिये|
  3. मुंहासे जब सूख जायें और उनकी काली कीलें दिखाई देने लगें तो उन्हें धीरे-धीरे हाथ से या किसी बड़ी चाभी के सिर से दबाकर निकाल दें| और उसके बाद चेहरे पर दूध की मलाई मल दें|
  4. रात को कागजी नीबू के रस में छुहारे की गुठली घिसकर चेहरे पर लेप करें और थोड़ी देर बाद धोकर मलाई मल दें|
  5. रात को कच्चा दूध चेहरे पर मलें और सवेरे उठ कर उसे धो डालें|
  6. अच्छा दही लेकर उसमें कपड़छन की हुई काली चिकनी मिट्टी मिलाए और रात को सोते समय चेहरे पर पोत कर सोयेँ| सुबह उठकर धो डालें|
  7. सन्तरे का छिलका पानी में पीसकर दिन में तीन बार चेहरे पर मलें|
  8. मुलहठी पानी में पीस कर चेहरे पर मलें|
  9. मसूर के आटे को घी और दूध में मिलाकर चेहरे पर उबटन करें|
  10. धनियां, पठानी लोध, सफेद बच, पीली सरसों, लाल चन्दन, मजीठ, कूठ कड़वी, मलकांगनी, बड़ के अंकुर, सेंघा नमक, काली मार्च एक-एक तोला, हल्दी आधा तोला मसूर की दाल चार तोला| इन सबको खूब महीन पीसकर और चमेली के तेल में घोंटकर रख लें| स्नान के पूर्व इसमें से लगभग दो तोला लेकर आधा तोला पिसी हुई खरिया मिट्टी मिलायेँ और चेहरे पर लेप करें| थोड़ी देर बाद लेप को मलकर छुटा दें और स्नान कर लें| स्नान के बाद चेहरे पर चमेली का तेल मल लें|
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