कब्ज के कारण और घरेलू इलाज – Qabz Ka Ilaj – Home Remedies for Constipation in Hindi

कब्ज आज की आधुनिक सभ्यता का रोग है| कब्ज को कोष्टबद्धता, विबंध, मलबंध, मलावरोध, आनाह, तथा विष्टबधत आदि कई नामों से पुकारते है| अंग्रेजी में इसको कास्टीपेशन कहते है| मल जब बड़ी आंत में जमा हो जाता है और किसी कारण से अपने रास्ते से बाहर नहीं निकलता बल्कि वहीं पड़ा-पड़ा सड़ा करता है तो उसे कब्ज होना कहते है| इस लिए आज हम कब्ज के बारे मे बात करेंगे तो चलिये जानते है कि कब्ज के कारण और इलाज क्या है |

कब्ज रोगी की पहचान – Identification of constipation patient

कुछ लोगों का रोज़ दस्त होते रहने पर भी कब्ज बना रहता है और कुछ व्यक्ति ऐसे होते है जिन्हें दो-दो दिन के बाद में एक बार पाखाना होने पर भी कब्ज नहीं रहता है| इस लिये हम में से बहुतों को यह मालूम नहीं रहता कि कब कब्ज रहता है और कब नहीं ? परन्तु यह सत्य है कि आज कल 99 प्रतिशत व्यक्ति इस रोग के शिकार है कब्ज मे रोगी को पाखाना साफ नहीं होता, हमेशा सुस्ती छाई रहती है, पेडू कठोर और पेट भारी रहता है| सिर मे दर्द रहा करता है, नींद ठीक से नहीं आती, मस्तिष्क खाली सा जान पड़ता है, भूख खुल कर नहीं लगती, तथा उसे अन्य कई रोग रहते है| कोष्टबद्धता को सब रोगों का जन्म दाता कहा जाता है| इसमें तनिक भी अतिशयोकित नहीं है |

मनुष्य-शरीर में दो प्रधान कार्य अनवरत रूप से जीवन-पर्यन्त होते है| प्रथम जो कुछ भी हम खाते या पिते है वह जठरारिन के संयोग से अनियन्त्रित जीवनी शक्ति द्रारा हमारे शरीर से मिलकर एकाकार होता रहता है| शरीर की इस क्रिया को हम एकीकरण (Assimilation) कहते है दितीय जो शरीर के भीतर पहूँची हुई वस्तु शरीर से मिलकर तद्रूप नहीं बन सकतीं, विजातीय द्व्य अथवा शरीर के लिए विकार रूप हैं, शरीर उनको बाहर निकाल फैंकने का प्रयन्त सदा-सर्वदा किया करता है शरीर की यह क्रिया (Elimination) बहिष्करण कहलाती है| इसी क्रिया के लिये पाखाना पेशाब होते है, और नांक, कान, आंख तथा त्वचा आदि से सदैव मल या पसीना निकला करता है| स्पष्ट है कि शरीर में  होने वाले दोनों कार्यो में बहिष्करण की क्रिया, एकीकरण की क्रिया से अधिक आवश्यक और उत्तम स्वास्थ्य के लिये परमोपयोगी है

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यदि हम अपने शरीर को एक बड़े शहर से उपमा दें तों कोष्ठ-प्रदेश को उसका सबसे बड़ा कूड़ाखाना मानना पड़ेगा| यह कूड़ाखाना यदि प्रतिदिन नियमित रूप से साफ न होता रहेगा तो निश्चय ही शरीर रूपी शहर में रहने वाले अगणित अंगोपाग रूपी नगर-व्ससियों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जायेगा और वे बीमार हो जायेगे| इसलिए यदि हम पूर्ण स्वस्थ रहना चाहते हैं तो हमें कब्ज कभी नहीं होने देना चाहिये |

कोष्ठबद्धता के दुष्परिणाम – Side effects of correlation

जैसे कि ऊपर कहा जा चुका है, शरीर के लगभग सभी रोगों के मूल में कोष्टबद्धता अवश्य होती है, जिसके कारण रोगों की तीव्रता बढ़ जाती है शरीर से विजातीय द्र्व्य का बाहर निकलना जब बन्द हो जाता है तब टाइफाइड तथा ह्रदय और मूत्राशय के रोग उत्पन्न होते है | हमारी आंतों में खाघ पदार्थो का रस चूसने का कार्य अविराम गति से चलता रहता है| पर जब उनकी आंतों मे मल जमा होकर सड़ने लगता है तब हमारी आंते उस जमा हुये मल से उसके विष को भी चूसती हैं और चूसकर उस विष को रक्त में मिला देती हैं जिससे रक्त विषाक्त हो जाता है जो नाना प्रकार के रोगों का कारण होता है |

कब्ज का इलाज – Treatment of constipation

Kabj होने पर बहुधा लोग जुलाब लेते है| किन्तु अनुभव से जाना गया है कि यह प्रयोग अंतड़ियों के लिए अत्यन्त हानिकारक है| चिकित्सकों की राय में सदैव जुलाब लेना भी कब्ज पैदा करता है इसलिए कब्ज मे जुलाब न लेकर यदि पहले गुनगुने पानी का तत्पश्चात ठंडे पानी का एनिमा कुछ दिनों तक लिया जाये तो बहुत लाभकरी सिद्ध होता है| यह विचार गलत है कि एनिमा लेने से एनिमा कि आदत पड़ जाती है|

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कब्ज दूर करने के कुछ अन्य उपचार – Some other treatments for relieving constipation

नीचे कब्ज दूर करने के लिये कुछ अनुभूत उपचार दिये गए है जिनको विधिवत चलाने से पुराने से पुराना कब्ज भी कुछ ही दिनों मे दूर किया जा सकता है|

  1. जिन कारणों से कब्ज होता है उनको सर्वप्रथम दूर करना चाहिए |
  2. एक दिन केवल जल पीकर उपवास रखना चाहिये फिर दो दिन तक रसाहार| रसाहार के लिए गाजर और पालक के रस उत्तम रहेंगे| तत्पश्चात 7 से 15 दिनो तक फलाहार| इस दिनों दोनों वक्त एनिमा लेना चाहिये| फलाहार के बाद एक वक्त दूध फल और दूसरे वक्त रोटी, सब्जी दही और सलाद| भोजन में फल और सब्जी की मात्रा अन्न से हर हालत में दुगनी रहनी चाहिये| जब कब्ज दूर हो जाये तो सादे और सात्विक भोजन पर आ जाना चाहिये| चोकर समेत आटा, पके फल (विशेषकर अमरूद, बेल,पपीता,) धारोष्ण दूध, ताजी साग सब्जियां उबली और कच्ची, सादे और सात्विक भोजन वाले खाघ पदार्थ है| घी, तेल, आचार, खटाई, और मिठाइयां गुरुपाक होने से उनका सेवन कदापि युक्तिसंगत नहीं है और मिर्च-मसाले आदि का मोह तो सबसे पहले त्यागना होगा|
  3. सुबह सोकर उठते ही परन्तु सूर्योदय के प्रथम सायंकाल का रखा हुआ शुद्ध जल लगभग आधा किलो या जितना आसानी से पिया जा सके, धीरे-धीरे पीकर उसे थोड़ी देर बाद शौच जाना कब्ज को अति शीघ्र दूर करता है| इसी प्रयोग को वैधक शास्त्रों में “उषापान” कहा गया है| इसके अनेक गुण है|
  4. सप्ताह में एक दिन उपवास करने का नियम बना लेना चाहिये उस दिन ताजे जल में कागजी नींबू का रस मिलाकर काफी मात्रा में पीना चाहिये|
  5. प्रतिदिन नियमित रूप से कोई हल्का व्यायाम और गहरी श्वास लेने की कसरतें अवश्य करनी चाहिये| सुबहा-शाम 4 से 6 किलोमीटर तक वायु में तेजी के साथ टहलना एक अच्छा व्यायाम है|
  6. प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ लुईकूने ने बालू को कब्ज की अचूक दवा कहा है| एक चुटकी समुद्री साफ बालू भोजन के बाद में दो-तीन बार पानी के सहारे निगल लेना चाहिये| ऐसा करने से दूसरे ही दिन आंते ढीली पड़ जाती है और उनमें का पुराना जमा मल निकलना आरम्भ हो जाता है, जिससे कुछ ही दिनों मे कब्ज से छुटकारा मिल जाता है|
  7. 50 ग्राम गेंहू का साफ चोकर सबेरे शाम भोजन में मिलाकर खाने से भी कब्ज दूर होती है| चोकर को चाहे जैसे खाया जा सकता है रोटी मे मिलाकर, तरकारी मे मिलाकर या दाल मे डालकर|
  8. आधे गिलास ठंडे पानी में एक कागजी नींबू का रस डालकर दिन में 4 से 6 बार तक पीना इस रोग में लाभ करता है|
  9. एनिमा द्धारा प्रात:काल गुनगुने पानी से जिसमें दो-तीन बूंद कागजी नींबू का रस मिला हो, पेट साफ कर लेना चाहिये| इस प्रयोग को जब भी पेट भारी हो, करना चाहिये|
  10. भोजन करने के आधा घंटा पहले थोड़ा गुनगुना पानी पीना लाभ करता है|
  11. भोजन के साथ जल बहुत कम या बिलकुल ही न पिया जाये| भोजन करने के दो घंटे बाद इच्छानुसार जल पीना चाहिये|
  12. प्रात: साय शक्ति अनुसार 5 से 20 मिनट तक कटि स्नान करना, या पेडू पर 30 मिनट तक मिट्टी की पट्टी बांधना लाभ करती है|
  13. सबेरे नाश्ता करने की आदत छोड़ देने से कोष्टबद्धता के रोगी को बड़ा लाभ होता है|
  14. नारंगी या पीली बोतल में बनाया हुआ सूर्य-तप्त जल 50 ग्राम दिन में तीन बार पीना चाहिये|
  15. कुछ दिनों तक रात में 10-20 ग्राम त्रिफला चूर्ण या केवल छोटी हरड़ का मोटा चूर्ण सेवन करने से कब्ज टूटने में आसानी होती है|
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